बढ़ते साइबर क्राइम के बीच यूपी के बरेली जोन में डिजिटल वॉलिंटियर्स की बड़ी वर्कशॉप : आधुनिक डिजिटल युग में डिजिटल वॉलिंटियर्स हैं खाकी के ब्रह्मास्त्र : एडीजी रमित शर्मा
लखनऊ (धर्मेंद्र रस्तोगी/जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)। आधुनिक डिजिटल युग में डिजिटल वॉलिंटियर्स खाकी के ब्रह्मास्त्र हैं। समाज में शांति व्यवस्था स्थापित कराने से लेकर साइबर क्राइम की रोकथाम, क्राइम कण्ट्रोल, लॉ एंड ऑर्डर, एक्टिव पुलिसिंग समेत विभिन्न क्षेत्रों में उनकी महती भूमिका संभव है। ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फेक न्यूज, अफवाह रोकने में डिजिटल वॉलिंटियर्स का पुलिस महकमे के साथ साझा प्रयास काफी सार्थक हो सकता है। यूपी के बरेली जोन में डिजिटल वॉलिंटियर्स कार्यशाला में एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि उक्त विचार व्यक्त किये। जनपद बरेली में पुलिस लाइन में आयोजित जोन स्तरीय वर्कशॉप में एडीजी ने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में डिजिटल वॉलिंटियर्स की विशेष भूमिका है। एक समय में बच्चा चोर, ड्रोन चोर, नमक समस्या, बंदर मारने जैसी अफवाहों पर विराम लगाने में डिजिटल वॉलिंटियर्स की खास सक्रियता रही। एडीजी ने डिजिटल वॉलिंटियर्स को उनके महत्व, उनकी भूमिका, सक्रियता के बारे में विस्तृत बताया। बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद समेत विभिन्न इलाकों में पूर्व में प्रसारित अफवाहों और उन अफवाहों के चलते लॉ एंड ऑर्डर सम्बन्धी उत्पन्न समस्याओं के दौरान डिजिटल वॉलिंटियर्स के सहयोग का जिक्र करते हुए एडीजी ने पुलिस प्रशासन व समाज के लिए उनकी भूमिका की बारीकियां भी बतायीं। 2015 में मेरठ रेंज से डिजिटल वॉलिंटियर्स का आगाज करने वाले आईपीएस रमित शर्मा ने बताया कि कैसे समाज विरोधी तत्वों के नापाक इरादों को डिजिटल वॉलिंटियर्स के सहयोग से कुचला जा सकता है? कैसे अफवाहों, फेक न्यूज पर विराम लगाने में डिजिटल वॉलिंटियर्स की महती भूमिका है? पुलिस प्रशासन के समाजहितकारी कार्यों का प्रचार प्रसार करने में कैसे डिजिटल वॉलिंटियर्स मददगार हो सकते हैं? एडीजी ने कहा कि एआई के इस दौर में कुछ भी संभव है। जरूरी ये है कि लोगों को ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, हनी ट्रैप से बचाने को व्यापक जागरूक करने के साथ साथ रोड सेफ्टी, अपराध नियंत्रण, लॉ एंड ऑर्डर बनाये रखने में प्रभावी सहयोगी बनने, अफवाहों व फेक न्यूज का असरदार खंडन करने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक दशा में सक्रिय होकर अपनी सक्रिय भूमिका सभी डिजिटल वॉलिंटियर्स को निभानी होगी। डिजिटल वॉलिंटियर्स को दुर्भावनापूर्ण सूचनाओं से पूरी तरह बचना चाहिए। एडीजी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई विशेषकर डीपफेक तकनीक के संभावित दुरुपयोग के प्रति सतर्क रहने पे बल देते हुए सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिये की जा रही समाजविरोधी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं कार्यवाही के बाबत जानकारी दी। बरेली जोन के साइबर थानों के सीयूजी नंबर, जनपदवार थानों की लोकेशन साझा की। डिजिटल वॉलंटियर्स से उनके अनुभव, फीडबैक एवं सुझाव लिए। एडीजी ने बताया कि दस वर्ष पहले ट्विटर पर डीआईजी मेरठ रेंज के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस की पहली आधिकारिक उपस्थिति दर्ज की गई, जिसने डिजिटल संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण पहल स्थापित की। बागपत जिले के संवेदनशील प्रकरण में डिजिटल वॉलंटियर्स का प्रयोग घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को सही, त्वरित जनमानस तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रारम्भ हुआ, जो आगे चलकर प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। विशिष्ट अतिथि डीआईजी बरेली रेंज अजय साहनी भी मौजूद रहे। एसएसपी बरेली अनुराग आर्य, पुलिस कप्तान रामपुर विधासागर मिश्रा ने भी वर्कशॉप में अपना प्रेजेंटेशन दिया। बरेली जोन में 82 हजार 332 डिजिटल वॉलिंटियर्स हैं। आज की वर्कशॉप में 9 जिलों के डिजिटल वॉलिंटियर्स बड़ी संख्या में मौजूद रहे। डिजिटल वॉलिंटियर्स की भूमिका को और सशक्त कैसे बनाया जाए? इस बाबत जोनभर से आए डिजिटल वॉलिंटियर्स ने भी अपना फीडबैक दिया। पंजाब के पूर्व आईजी सरदार अमर सिंह चहल घटना के सुर्खियों में होने के बीच एडीजी की ये वर्कशॉप काफी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। साइबर अपराधियों ने कैसे पूर्व आईजी को डिजिटल अरेस्ट बनाकर करोड़ों की ठगी कर ली। घटना से आहत होकर पूर्व आईजी ने सुसाइड कर लिया। पूर्व आईजी सुसाइड केस इन दिनों सुर्खियों में है। (जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)।