23 साल पुराने जज्बे संग बाहर निकली प्रतिभा : यूपी का बरेली पुलिस लाइन ग्राउंड बना खेल की दुनिया के लिए मिसाल ! दक्ष अफसर ही नहीं बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी भी निकले आईपीएस रमित शर्मा ! अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी मनोज जग्गी ने खिलाड़ियों को किया प्रेरित
लखनऊ (धर्मेंद्र रस्तोगी/जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)। सच ही कहा है कि किसी चिराग का अपना मकाँ नहीं होता, जहाँ जायेगा रोशनी लुटायेगा। खेल की दुनिया और खेल के मैदान से शुक्रवार को एक ऐसी प्रतिभा दिखी जो ना सिर्फ दक्ष पुलिस अफसर का किरदार निभाकर यूपी पुलिस के होनहार अफसरों की गिनती में शामिल है अपितु एक बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी भी। पुलिस लाइन बरेली में 23 साल पुरानी ऐतिहासिक जीत की यादें ताजा हुईं, जहाँ 2002 में खेले गए अंतर्जनपदीय पुलिस फुटबॉल प्रतियोगिता में आईपीएस रमित शर्मा और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी मनोज जग्गी की जोड़ी ने धमाल मचाया था। वो स्वर्णिम पल उत्तर प्रदेश पुलिस के दिग्गज अफसर, खिलाड़ी शायद ही भूल पायें, जब बरेली के नकटिया मैदान पर आयोजित टूर्नामेंट में बनारस जोन टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। टीम का नेतृत्व तत्कालीन एएसपी बनारस मौजूदा एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा ने किया था। इस खेल प्रतियोगिता में में भारत के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी और गोलकीपर मनोज जग्गी भी शामिल रहे, जिनकी कुशल नेतृत्व क्षमता ने बरेली के मैदान में विरोधी टीमों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। प्रतियोगिता के फाइनल में कानपुर जोन पुलिस और बनारस जोन पुलिस के जबरदस्त संघर्ष के बीच बनारस पुलिस की टीम ने विजय पताका लहराई और पूरे प्रदेश में जीत का परचम फहराया। बरेली से जब गोल्ड मेडल लेकर टीम बनारस पहुंची, तो वहां उस समय के आईजी विक्रम सिंह, एसएसपी अनिल अग्रवाल ने कहा कि हमें उम्मीद नहीं थी कि तुम जीत पाओगे, लेकिन तुमने उत्तर प्रदेश पुलिस का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। आज 23 साल बाद जब एडीजी रमित शर्मा बरेली में आयोजित 73 वीं यूपी पुलिस फुटबॉल प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि बनकर मैदान में पहुंचे तो मैदान और फुटबाल ने उनकी पुरानी यादें ताजा कर दीं। खिलाड़ियों को फुटबॉल खेलते देख एडीजी रमित शर्मा खुद की प्रतिभा को बाहर निकालने से रोक न पाए। इस अवसर पर एडीजी रमित शर्मा ने कहा कि खेल सिर्फ जीत और हार का नाम नहीं है बल्कि यह चरित्र, अनुशासन और टीम भावना का प्रतीक है। वास्तव में मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ी ही असली योद्धा होते हैं। खिलाड़ियों के लिए यादगार पल ये रहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस फुटबॉल टीम के पूर्व कोच और वर्तमान में यूपी फुटबॉल के ब्रांड एंबेसडर मनोज जग्गी समारोह का हिस्सा थे। जग्गी ने मंच से अपने संस्मरण साझा किए। बताया कि कैसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खेल को सिर्फ करियर नहीं, इबादत समझिए। मैदान पर ईमानदारी से खेलो, जीत खुद आपके पीछे दौड़ेगी। जग्गी ने 1994 में ब्रुनेई में आयोजित अंडर 19 प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1995 में मलेशिया के कुआलालंपुर में जग्गी फिर देश की शान बने। 1998 में मुम्बई में आयोजित रोवर्स कप में भाग लिया और ईस्ट बंगाल को हराकर ड्यूरंड कप जीतने वाली महिंद्रा यूनाइटेड टीम के हिस्सा बने।1998 में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का पुरस्कार प्राप्त किया। वैसे तो पुलिस लाइन में फुटबाल प्रतियोगिता का आयोजन एसएसपी बरेली अनुराग आर्य ने कराया। बेहतर प्रबंधन, खिलाड़ी टीमों की मेजबानी बरेली पुलिस ने शानदार ढंग से की। पुलिस लाइन की व्यवस्थाओं को एडीजी ने सराहा। कहा कि प्रतियोगिता का आयोजन भले ही एक टूर्नामेंट हो, लेकिन इसमें बसी स्मृतियां, संघर्ष और स्वाभिमान आज भी उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। मैदान में गूंजती सीटी, दौड़ते खिलाड़ी और झूमती भीड़ ने साबित कर दिया कि खेल का जुनून उम्र या पद नहीं देखता बस समर्पण देखता है। फुटबॉल के फाइनल मैच के सभी प्रतिभागी पुरस्कृत किये गए। एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय साहनी, एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी सॉउथ अंशिका वर्मा, एसपी नॉर्थ मुकेश मिश्रा, एसपी ट्रेफिक अकमल खान, रिटायर्ड डिप्टी एसपी जेएस पाटनी समेत तमाम अफसर प्रोग्राम में मौजूद रहे। (जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)।