बगैर किसी घटना-दुर्घटना के माघ मेला निपटाने को एक्शनमोड में डीजीपी राजीव कृष्ण ! वीसी के जरिये जिम्मेदारों को यूपी पुलिस प्रमुख की खरी-खरी ! पूर्व अनुभव के बावजूद शिथिलता हुई तो जवाबदेही होगी तय
लखनऊ (धर्मेंद्र रस्तोगी/जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)। यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने माघ मेला सकुशल व बगैर किसी घटना के निपटाने को निर्देश दिए हैं कि टॉप मैंनेजमेंट के साथ ही अति बेहतर रणनीति बेहद जरूरी है। सोमवार को सिग्नेचर बिल्डिंग से वीसी के जरिये डीजीपी ने खास बिन्दुओं पे निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की तरफ से माघ मेला के बाबत प्रयागराज में आयोजित संगोष्ठी एवं टेबल-टॉप एक्सरसाइज में माघ मेला के प्रभावी व्यवस्थापन, लोगों के डूबने की घटनाओं की प्रभावी रोकथाम, शीतलहर, अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर अहम चर्चा हुई। संगोष्ठी, टेबलटॉप एक्सरसाइज में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रतिभाग करते हुए डीजीपी ने कहा कि कुंभ, माघ मेला विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक जनसमूह आयोजनों में से हैं। कुंभ मेला, माघ मेला में भी कुछ ऐसे दिन होते हैं जब वहाँ एक ही समय और एक ही स्थान पे जनसमूह की संख्या अच्छी खासी हो जाती है। ऐसे आयोजनों में जहाँ चुनौती केवल भीड़ की विशाल संख्या नहीं, बल्कि उसकी निरंतर बदलती गतिशील प्रकृति होती है। उच्च घनत्व वाली भीड़, नदी से जुड़े जोखिम, शीतलहर के प्रभाव, अग्निदुर्घटनाओं की संभावनाएँ, परिवहन, ट्रैफिक व पार्किंग जैसी समस्याएँ एक साथ पैदा होती हैं, इनसे निपटने के लिए समग्र, बहुआयामी रणनीति आवश्यक है। पुलिस प्रमुख ने इस बात पे विशेष जोर दिया है कि अब व्यवस्थापन का दृष्टिकोण महज घटना बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूर्वानुमान आधारित, योजनाबद्ध और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना अनिवार्य है। विभिन्न विभाग अपनी अपनी तैयारियाँ करते हैं, किंतु किसी भी आपात स्थिति में इन सभी तैयारियों को एकीकृत, समन्वित और समयबद्ध प्रतिक्रिया में परिवर्तित करना अत्यंत जरूरी है। डीजीपी ने प्रवेश,निकास मार्गों की वैज्ञानिक योजना, स्नान घाटों पे भीड़ की आवाजाही के संतुलित प्रबंधन, माइक्रो क्राउड की निरंतर निगरानी जैसे टिप्स दिए। यूपी पुलिस चीफ बोले कि एसडीआरएफ अब केवल एक बैकअप बल नहीं, बल्कि भीड़ सुरक्षा, आपदा प्रबंधन की ऑपरेशनल व्यवस्था का अभिन्न अंग बन चुका है। पहले के आयोजनों में भी उच्च स्तर की दक्षता, पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन एसडीआरएफ ने किया है। अग्नि दुर्घटना, शीतलहर और डूबने से संबंधित जोखिमों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन सभी संभावित खतरों के लिए विभागों के बीच शत प्रतिशत समन्वय, प्रभावी संचार और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र आवश्यक है। डीजीपी ने अधिकारियों को आगाह किया है कि पूर्व अनुभव होने के बावजूद किसी स्तर पे शिथिलता नहीं आनी चाहिए। संगोष्ठियाँ व टेबलटॉप एक्सरसाइज प्रशासन, पुलिस की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा, विश्वास सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जीओसी मध्य भारत जबलपुर पीएस शेखाबत, एडीजी प्रयागराज जोन डॉ संजीव गुप्ता, पुलिस कमिश्नर प्रयागराज जोगेंद्र कुमार, मंडलायुक्त प्रयागराज सौम्या अग्रवाल, परियोजना समन्वयक प्रशिक्षण प्रवीण किशोर, अनिमेष सिंह आदि संगोष्ठी का हिस्सा बने। (जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)।