संघर्ष से कामयाबी तक: सहसवान के नदीम अहमद कानूनगो के दोनों बेटों ने रोशन किया नाम
बदायूं(जे०आई०न्यूज़) सहसवान कहा जाता है कि तालीम वह दौलत है जिसे न कोई चुरा सकता है और न ही वक्त उसकी अहमियत कम कर सकता है। जब वालिदैन अपनी औलाद को अच्छी तर्बियत, मेहनत और तालीम देते हैं, तो कामयाबी खुद उनके कदम चूमती है। सहसवान के मोहल्ला रुस्तम टोला निवासी नदीम अहमद कानूनगो का परिवार आज इसी बात की मिसाल बन गया है।
नदीम अहमद ने अपनी नौकरी का आगाज़ राजस्व विभाग में लेखपाल के तौर पर किया। अपनी ईमानदारी, लगन और फ़र्ज़शनासी के दम पर उन्होंने विभाग में अलग पहचान बनाई और तरक्की पाकर आज राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के पद पर अपनी खिदमत अंजाम दे रहे हैं। उनका हमेशा से यही यकीन रहा कि औलाद के लिए सबसे बड़ी विरासत अच्छी तालीम है।
इसी सोच का नतीजा है कि वर्ष 2023 में उनके बड़े बेटे समीर अहमद ने मुल्क की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में शुमार NEET इम्तिहान पास कर एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ में एमबीबीएस में दाखिला हासिल किया। वह इस वक्त एमबीबीएस तृतीय वर्ष के तालिब-ए-इल्म हैं और एक काबिल डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
अब छोटे बेटे नवील अहमद ने भी अपने बड़े भाई के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए कड़ी मेहनत और लगन से NEET इम्तिहान कामयाबी के साथ पास कर एमबीबीएस में दाखिला हासिल किया है। इस कामयाबी के साथ उन्होंने अपने वालिदैन के अरमानों को नई उड़ान दे दी है।
एक ही परिवार के दोनों बेटों का मेडिकल तालीम के मैदान में कामयाब होना न सिर्फ उनके खानदान बल्कि पूरे सहसवान और बदायूं जिले के लिए फख्र की बात है। यह कामयाबी इस बात का पैगाम देती है कि अगर घर में तालीम का माहौल, वालिदैन की रहनुमाई और बच्चों की मेहनत हो, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं रहती।
नवील अहमद की कामयाबी की खबर मिलते ही इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदार, अहबाब, दोस्त, समाजी और सियासी शख्सियतें तथा राजस्व विभाग के अफसर व मुलाज़िम नदीम अहमद के घर पहुंचकर उन्हें और उनके परिवार को मुबारकबाद पेश कर रहे हैं और दोनों बेटों के रोशन मुस्तकबिल के लिए दुआएं दे रहे हैं।
नदीम अहमद कानूनगो का परिवार आज तालीम, मेहनत, तर्बियत और कामयाबी की ऐसी मिसाल बन गया है, जो नई नस्ल के लिए हौसले, उम्मीद और प्रेरणा का पैगाम है।